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Fri. Mar 1st, 2024


विश्व आर्थिक मंच 2024: साल 2024 में भी ग्लोबल इंडस्ट्री को भारी चुनौती का सामना करना पड़ा। विश्व के 56 प्रतिशत मुख्य अर्थशास्त्रियों का मानना ​​है कि स्थिर वर्ष में वैश्विक अर्थव्यवस्था में कमी देखने को मिल सकती है। वहीं 10 में से सात अर्थशास्त्रियों का मानना ​​है कि ग्लोबल इकोनोमिक बैकाव की साख में और तेजी आ सकती है।

वैश्विक आर्थिक विकास के समर्थक

दावोस में ग्लोबल इकोनॉमिक फोरम की हो रही बैठक के पहले दिन वैश्विक आर्थिक परिदृश्यों को लेकर इकोनोमिस्ट्स आउटलुक की रिपोर्ट जारी की गई। इस रिपोर्ट के अनुसार 56 प्रतिशत अर्थशास्त्रियों का मानना ​​है कि ग्लोबल इंडस्ट्री 2024 में बेरोजगारी की समस्या मिल सकती है। जबकि 53 फीसदी ऐसे अर्थशास्त्रियों का मानना ​​है कि बदलावों में कोई बदलाव नहीं होगा या फिर वैश्विक उद्योग सूची सामने आ सकती है। इन अर्थशास्त्रियों में बड़े पैमाने पर तबके का ये भी मानना ​​है कि आने वाले दिनों में लेबर मार्केट और वित्तीय स्थिति और गिरावट होगी। हालाँकि उच्च अर्थव्यवस्था की संभावना पर अब नजर नहीं आ रही है और हर क्षेत्र के विकास के आउटलुक पर अलग नजर आ रही है और ऐसे किसी क्षेत्र 2024 में नजर नहीं आ रही है जहां आर्थिक रूप से मजबूत विकास पर नजर आ रही है।

बास्केटबॉल के साथ बढ़ती रही असमन्ता

वर्ल्ड इकोनोमिस्ट्स के प्रमुख सादिया जाहिदी ने कहा, ग्लोबल इकोनोमिस्ट्स नेचुरल नेचर के स्थिर आर्थिक ढांचे की ओर इशारा करता है। उन्होंने कहा कि, अस्थिर प्रकृति के बीच, आने वाले प्राचीन काल में वैश्विक अर्थव्यवस्था के सिद्धांत का प्रभाव होने वाला है। पूरी दुनिया में टूर्नामेंट में कमी आ रही है। विकास की साख में बढ़ोतरी हुई है, वित्तीय वित्तीय स्थिति बेहद मजबूत बनी हुई है, वैश्विक हिस्सेदारी बढ़ती जा रही है और साथ में भी बढ़ती जा रही है। ऐसे में वैश्विक सहयोग की आवश्यकता है जो स्थिरता, समग्र आर्थिक विकास को गति दे सके।

दक्षिण एशिया पर रिसर्चर हैं

दुनिया के प्रमुख अर्थशास्त्रियों का आउटलुक दक्षिण एशिया, पूर्वी एशिया और फिक रिजन को सकारात्मक लेकर आया है और पिछले साल के इकोनोमिक्स के आउटलुक में उनके रुख में कोई बदलाव नहीं आया है। ज्यादातर अर्थशास्त्रियों का मानना ​​है कि 2024 में सीमित बिक्री देखने को मिल सकती है। आउटलुक का कहना है कि बुनियादी ढांचे में कमी, औद्योगिक उत्पादन में गिरावट और संपत्ति के बाजार में बने रहने वाले बाजार में चीन में विकास की सीमाएँ सीमित बनी हुई हैं और किसी सुधार के संकेत पर नजर नहीं आ रही है।

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