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बैंक जीएनपीए अपडेट: देश के बैंकों के सकल एनपीए (सकल गैर-निष्पादित परिसंपत्ति) में कमी आई है। वित्त वर्ष 2022-23 और 2023-24 के पहले बैंकिंग क्षेत्र के नियामक भारतीय रिजर्व बैंक ने कहा है कि बैंकों के एसेट गुणवत्ता में सुधार की प्रक्रिया की शुरुआत सितंबर 2023 से हो रही है। ग्रॉस नॉन परफॉर्मिंग एसेट (जीएनपीए) की समाप्ति पर बांड 3.2 प्रतिशत पर आ गया है।

भारतीय रिजर्व बैंक ने सेक्टर के रुझान और प्रगति को लेकर (भारत में बैंकिंग की प्रवृत्ति और प्रगति 2022-23 पर रिपोर्ट) नाम से रिपोर्ट जारी की है। इस रिपोर्ट में 2022-23 और 2023-24 के दौरान को-कॉमकॉम सेक्टर, के प्रदर्शन का जिक्र किया गया है और इसमें एनबीएसी का प्रदर्शन भी शामिल है। रिपोर्ट के मुताबिक स्ट्रैटेजिक और स्ट्रेटेजी सेक्टर को क्रेडिट में समूह, समर्थकों में समर्थकों का समूह, 2022-23 में 12.2 फीसदी का उछाल देखने को मिला है। हालाँकि बिजनेस का मैक्रोसेल क्रेडिट रेंटल रिटेल के कॉम्प्लेक्स कम हो रहा है।

आरबीआई की रिपोर्ट के अनुसार वित्त वर्ष 2023-24 की पहली पत्रिका सितंबर में समाप्त होने पर बैंकों का सकल एनपीए मार्जिन 3.2 प्रतिशत था जो मार्च महीने में समाप्त होने पर 3.9 प्रतिशत था। 2022-23 में ब्याज से आय यानी शुद्ध ब्याज आय के अधिकतर रहने और कम प्रोविजनिंग के बने रहने से बैंकों के नेट इंटरेस्ट मार्जिन (एनआईएम) और मार्जिन में उछाल देखने को मिलता है।

मैकेनिकल सेक्टर के रुझान और प्रगति रिपोर्ट में बताया गया है कि 2022-23 में पर्सनल लोन और सेक्टर को सबसे ज्यादा लोन दिए जाने के कारण ग्रॉस बैंक क्रेडिट में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। पर्सनल लोन में क्रेडिट कार्ड लोन जेसाई एनसिकॉर्ड लेंडिंग में उछाल आ रहा है। एनबीएफ़सी को मुख्य ऋण के रूप में जाना जाता है। आरबीआई की इस रिपोर्ट के अनुसार सितंबर 2023 तक बैंकों का ग्रॉस एनपीए सबसे अधिक कृषि क्षेत्र में है। जबकि सबसे कम क्वालिटी लोन में देखने को मिलती है।

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