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दालें आयात: भारत में दालों की मांग पूरी करने के लिए केंद्र सरकार लगातार प्रयासरत है। सरकार ने हाल ही में मोजाम्बिक, मलावी और म्यांमार से दालों का आयात करने के लिए समझोता किया था। अब भारत ने दक्षिण अमेरिकी देश का रुख अपनाया है। सरकार ने इस संबंध में अर्जेंटीना और ब्राजील से बातचीत शुरू कर दी है। भारत सरकार की कोशिश है कि देश में तुअर और उड़द दाल की खेती की जाए और उसे भारत को दे दिया जाए।

दक्षिण अमेरिकी देशों में दालों की आबादी काफी कम है

सरकार के अनुसार, भारत और अर्जेंटीना के बीच बातचीत की प्रगति अच्छी हो रही है। भारत में पैदा हुई दालों को मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (एमओयू) के लिए साइन किया गया ताकि इन दालों को कहीं और न देखा जाए। हाल ही में ब्राजील के कृषि अधिकारियों ने भारत का दौरा किया था। इस दौरान भारत ने इस डील को लेकर चर्चा की थी. सरकारी दालों के लिए कुछ देशों पर प्रतिबंध है। अब इस पोर्टफोलियो को सरकार खत्म करना चाहती है। दक्षिण अमेरिकी देशों में दालों की कीमतें काफी कम हैं। साथ ही दालों को उगाने के लिए बिल्कुल सही मौसम भी। इसलिए भारत के लिए ये देश अच्छे विकल्प हैं।

2.28 मिलियन टन दालों का आयात हुआ

इस साल भारत ने 2.28 मिलियन टन दालों का आयात किया है। इसमें 1.08 मिलियन टन मसूर, 0.77 मिलियन टन तुअर, 0.42 मिलियन टन उड़द या काली दाल शामिल है। इसमें ज्यादातर एशिया, कनाडा, म्यांमार, मोजाम्बिक, तंजानिया, सूडान और मलावी से किया गया है। ब्राज़ील में 3 मिलियन टन दाल का उत्पादन होता है। इससे न केवल घरेलू मांग पूरी हो जाती है। साथ ही वियतनाम, पाकिस्तान और इजिप्ट भी शामिल हैं। भारत तुअर दाल की मांग को पूरा करने के लिए इथियोपिया और तंजानिया में स्टॉक तलाश रही है।

चना और सैमसंग का लैपटॉप

देश में चना और मूंग का उत्पादन कुल निवेशकों को पूरा कर देता है। हमें इसकी आवश्यकता नहीं है। भारत में दालों का उत्पादन तेजी से बढ़ा है। मगर, मांग की पैकेजिंग नहीं हो पा रही है। सरकार ने हाल ही में तुअर, उदद और मसूर की आयत से साक्षात्कार हटाया था। क्योंकि कमी के चलते भारत में कीमत बढ़ने लगी थी। देश में होने वाली कुल मालदीव का लगभग 15 प्रतिशत हिस्सा सरकार को शामिल होना है।

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