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वेदांत राजनीतिक दान अद्यतन: एक तरफ वेदांता लिमिटेड (वेदांता लिमिटेड) खुद बकाये कर्ज का भुगतान करने के लिए सेक्युली स्टॉक में है। इसके बावजूद कंपनी के राजनीतिक शास्त्र को चंदे में पीछे से नजर नहीं आ रही है। इस साल नवंबर महीने में पांच राज्यों में चुनाव के ठीक पहले वेदांता लिमिटेड के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स ने 200 करोड़ रुपये की राजनीतिक व्यवस्था के लिए एक प्रस्ताव रखा था, जिसमें चंदा लीज पर अपनी हिस्सेदारी रखी गई थी। बोर्ड ने अपने अतिरिक्त 57 करोड़ रुपये के शेयर को अपने शेयर में शामिल कर लिया है, जो कि साल जून 2022 में पॉलिटिकल आश्रम को मंजूरी दे दी गई थी, लेकिन यह कैश रजिस्टर जारी नहीं किया जा सका।

इकोलाइक टाइम्स के नोट्स से समाने आई इस रिपोर्ट के अनुसार 5 नवंबर 2023 को वेदांता के बोर्ड ने रिजॉल्यूशन जारी कर राजनीतिक विचारधारा को चंदा दे पर अपनी छाप छोड़ी थी। यह फैसला भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के 29वें चरण के इलेक्टोरल बॉन्ड को ठीक दो दिन पहले लिया गया था। वेदांता के बोर्ड से स्वीकृत प्रस्ताव के अनुसार 200 करोड़ रुपये और 57 करोड़ रुपये का राजनीतिक चंदा नीचे दिए गए अनुमोदन मार्च 2025 तक वैध है। यह दान सीधे या फिर चुनावी बांड (चुनावी बांड) की सदस्यता के आधार पर किया जा सकता है।

किसी राजनीतिक दल को किस तरह का चंदा देना है इसके लिए बोर्ड ने प्रस्ताव दिया है कि किसी भी राजनीतिक दल को अधिकारिक तौर पर अधिकार दिया जा सकता है। निश्चित समय में अनिल अग्रवाल कंपनी के हथियारबंद हैं तो नवीन अग्रवाल वैगनआर्डर पद पर कायम हैं। रिपोर्ट के मुताबिक वेदांता ने राजनीतिक शास्त्रार्थ को 457 करोड़ रुपये का चंदा दिया है, जिसमें इस साल 155 करोड़ रुपये जारी हुए हैं।

हाल के वर्षों में राजनीतिक शास्त्र तो ज्यादातर चंदा नामांकन के माध्यम से जारी किया गया था जिसे 2018 में लॉन्च किया गया था। इकोनॉमिक्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक 2018-2022 के बीच 13,791 करोड़ रुपए के बीच 13,791 करोड़ रुपए के इकोनॉमिक्स बॉन्ड जारी किए गए हैं।

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