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Fri. Mar 1st, 2024


भारत में खाद्य मुद्रास्फीति: वित्त मंत्रालय ने देश में उच्च खाद्य उत्पादों पर चिंता जाहिर की है। मंत्रालय ने वित्त वर्ष 2023-24 के छह महीने की जारी की गई समीक्षा में कहा कि भारत में उच्च खाद्य उत्पाद दर चिंता का सबब बना है लेकिन स्थिरता दौर में शांति पूरी दुनिया में तेजी से देखने को मिल रही है। रिपोर्ट में कहा गया है कि पूरी दुनिया में हेडलाइन मुद्रास्फीति धीरे-धीरे कम हो रही है, भारत के थोक ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, इटली, दक्षिण अफ्रीका और जापान जैसे देशों में स्थिर वित्त वर्ष की पहली छमाही में खाद्य उद्योग सबसे ज्यादा बने हैं। वित्त मंत्रालय ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि स्थिर वित्त वर्ष में 6.5 प्रतिशत के अनुमान से अधिकतर रहेंगे।

वित्त मंत्रालय के अर्थशास्त्र प्रभाग ने वित्त वर्ष 2023-24 की छह माह की आर्थिक समीक्षा रिपोर्ट जारी की है। रिपोर्ट के अनुसार पहली बार पेट्रो उत्पादों में खुदरा महंगाई दर 2022-23 के 7.2 फीसदी के साथ 5.5 फीसदी रही, जिसमें कोर मुद्रास्फीति यानी गैर खाद्य सामानों में गिरावट का प्रमुख कारण था। लेकिन 2023-24 के पहले रिपब्लिक में खाद्य उद्योग में उछाल आया था। किराने की दुकानों के अवशेषों के बाद जुलाई अगस्त में कुछ खाद्य वस्तुओं की दुकानों में उथल-पुथल देखने को मिलती है। सरकार के पास से गुज़रने के बाद इसपर अशौट को सफलता मिली है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकार ने 25 किलों के लिए स्टूडियो उपलब्ध कराया है। पेज के एक्सपोर्ट पर 31 मार्च 2024 तक रोक लगा दी गई है। दाल की स्टॉक एक्सचेंज से राहत के लिए सरकार की ओर से भारत में दाल बेची जा रही है। 60 किलो चना में एक किलो चना और 30 किलो चना दाल में 55 किलो चना बिकता जा रहा है। गैर-बासमती चावल के निर्यात पर रोक लगा दी गई है तो गैर-बासमती व्हाइट राइस पर 20 प्रतिशत एक्सपोर्ट ड्यूटी लगा दी गई है। स्टॉक पर सरकारी स्टॉक सीमा तय कर दी गई है जिससे होर्डिंग रोकी जा सकेगी। तो सरकार 27 रुपये किलो में भारत आटा बेच रही है।

वित्त मंत्रालय ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि सरकार ने चीनी निर्यात पर रोक लगा दी है, जिससे चीनी सिक्किम में उछाल को रोका जा सके। प्रधानमंत्री मज़हब योजना के लिए अनुदान की राशि 200 रुपये से बढ़ाकर 300 रुपये कर दी गई है।

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