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Fri. Feb 23rd, 2024


बैंकों या एनबीएफ़सी से लोन वाले इंवेस्टमेंट को नए साल में शानदार पदक मिलने जा रहा है। रिजर्व बैंक ने लोन के किस्तों में डिफॉल्ट होने पर बैंक व फाइनेंसियल बैंक द्वारा वसूली जाने वाले मनमाने चार्ज पर लगा दिया है। पहले यह बदलाव नए साल की पहली तारीख से होने वाला था। अब इंवेस्टमेंट को इस राहत के लिए थोड़ा और इंतजार करना होगा। के मनमाना शुल्क और ब्याज आदि वसूली के कई मामले सामने आ रहे थे. इन मामलों को देखते हुए वैल्यूएशन रिज़र्व बैंक ने पासपोर्ट जारी करने के लिए वेबसाइट पर पहुंच का रास्ता तैयार कर लिया है। अब सेंट्रल बैंक ने डिफॉल्ट के केस में वसूली वाले चार्ज को लेकर पूरी तरह से सफाई कर दी है, जिससे कि प्रॉफिट को बड़ा फायदा होने वाला है।

जनवरी से ही होने वाला था बदलाव

पहले यह बदलाव नए साल की शुरुआत से यानी जनवरी 2024 की पहली तारीख से लागू हुआ था। अब इंवेस्टमेंट को इसके लिए कुछ दिनों का इंतजार करना होगा। रिजर्व बैंक ने इसके लिए डेडलाइन बढ़ाने की जानकारी दी है। अब बैंकों और एनबीएफ़सी को कहा गया है कि वे एक अप्रैल से नई लोन की नई व्यवस्था करें। वहीं पुराने लोन केस में उन्हें हर हाल में नई व्यवस्था 30 जून 2024 से पहले अमल करने को कहा गया है।

सरकुलर ने साफ कर दिया मामला

डिफॉल्ट के केस में वसूली जाने वाले चार्ज को लेकर रिजर्व बैंक ने सबसे पहले अगस्त 2023 में सरकरोल जारी कर स्थिति साफ की थी। सेंट्रल बैंक ने बताया कि बैंक और एनबीएफ़सी आदि किस तरह से लेवी वसूल कर सकते हैं। रिज़र्व बैंक का कहना है कि कर्ज़ के किस्तों के भुगतान में पेनल्टी रिस्टोर या पेनल्टी चार्ज वसूलने के पीछे का उद्देश्य यह था कि लोगों में कर्ज़ लेकर डिसिप्लिन का जन्म हो।

दांड में पैसा नहीं भरना चाहिए

अब रिजर्व बैंक ने यह साफ कर दिया है कि डिफॉल्ट होने वाले बैंक पर जो पैनल इन्टेस्ट रेवेन्यू पर पेनल्टी ब्याज वसूली करता है, उसे बंद करना होगा। अब लेवी को सिर्फ पीनल चार्जेज कहा जाएगा। यानी डिफॉल्ट पर अब रुचि के रूप में पेनल्टी नहीं है। इससे लाभ यह होगा कि ब्याज के रूप में पेनल्टी होने से दंडात्मक कंपाउंड का भुगतान नहीं होगा, अर्थात चक्र लाभ पर दंड का भुगतान नहीं करना होगा। इस बैंक की कंपनी बंद होगी, जिसमें कई मामलों में कर्ज़ के मूल ब्याज से कई गुना अधिक दंडात्मक ब्याज वसूली ली गई थी।

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