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Fri. Mar 1st, 2024


बजट की तारीख हर किताब के दिन के साथ करीब आ रही है। 31 जनवरी से संसद का बजट सत्र शुरू हो रहा है। सत्र की शुरुआत आर्थिक समीक्षा के साथ होगी और उनका अगला दिन यानी 1 फरवरी को वित्त मंत्री संसद में बजट पेशावर मंडल होगा। यह मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल का अंतिम बजट होने वाला है। बजट के कुछ ही महीने बाद चुनाव होने वाले हैं. इसके साथ यह अंतरिम बजट भी रहेगा। आइए जानते हैं, इस बजट में किन महत्वपूर्ण आंकड़ों पर लोगों की राय रहने वाली हैं…

कितना बड़ा अंतरिम बजट होगा?

हर बजट का सबसे पहला और सबसे बड़ा आकर्षण उसका आकार होता है। यह एक तरह से देश की आर्थिक ताकत का भी माप है। जिस देश की अर्थव्यवस्था सबसे मजबूत होगी, उस देश की अर्थव्यवस्था का आकार ही बड़ा होगा। मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में 2014 में पहला बजट करीब 18 लाख करोड़ रुपये था। वहीं पिछले वर्ष पेशी बजट का आकार 45 लाख करोड़ रुपये से अधिक था।

अर्थव्यवस्था कैसी है?

बजट में देश की आर्थिक स्थिति का भी सही से आकलन किया जाता है। अर्थव्यवस्था की स्थिति के दो बड़े संकेतक हैं- मुद्रास्फीति दर और राजकोषीय घाटा। अभी बजट से पहले इसी महीने सूसाओ ने पहला अग्रिम अनुमान दिया है, जिसमें चालू वित्त वर्ष के दौरान सकल वृद्धि दर 7.3 प्रतिशत रहने का अनुमान व्यक्त किया गया है। इससे पहले दिसंबर में रिजर्व बैंक ने 7 मार्च 2019 को 7 मार्च 2019 का अनुमान लगाया था। राजकोषीय समसामयिक वित्त वर्ष के लिए देखें तो चालू वित्त वर्ष के लिए पिछले बजट में 5.9 प्रतिशत के बराबर राजकोषीय समष्टि का अनुमान व्यक्त किया गया था। ऐसी आपदा है कि एक्चुअल चित्रा बजट अनुमान को पार कर जाए।

सरकार की कमाई: टैक्स और निवेश?

कोई भी सरकार बजट में आय और खर्च का खाका पेश करती है। सरकार को होने वाली कमाई के दो मुख्य स्रोत हैं- टैक्स और निवेश। टैक्स से कमाई के मामले में सरकार को जहां लाभ होने वाला है, वहीं विनिवेश के मुहिम पर झटका लग सकता है। टैक्स के मामले के दौरान चालू वित्त वर्ष के इनलाइन टैक्स फाइल करने वालों की संख्या का नया रिकॉर्ड बनाया जाता है। इसके साथ ही इस दौरान कई बार नए उच्च स्तर पर डेमोक्रेट का गठन किया गया। सरकार ने टैक्स से करीब 24 लाख करोड़ रुपये और विनिवेश से 51 हजार करोड़ रुपये का लक्ष्य तय किया था।

सरकार के ऊपर कितना कुल कर्ज?

सरकार होने हर बार बजट में टैक्स व विनिवेश सहित अन्य डेटाबेस से वाली कुल आय से अधिक खर्च का खाका पेश किया जाता है। ऐसे में अतिरिक्त खर्च की भरपाई करने के लिए सरकारी बाजार से कर्ज उठाया जाता है। अभी सरकार की ओर से जा रहे कर्ज़ पर आई क्रिस्टोफर की एक रिपोर्ट पर विवाद भी खड़ा हो गया था, जिसमें खतरनाक स्तर की बात कही गई थी कि भारत में भी कुल कर्ज़ 100 फीसदी से ऊपर जा सकता है। बजट में इस स्थिति साफ होने की उम्मीद है.

किस स्थान पर और कितनी लागत?

यह बजट का सबसे अहम घटक है। सरकार आने वाले समय में किस तरह से, कहां और कितने खर्च करने वाली है, इस उद्योग की दशा-दिशा निर्धारित होती है। जैसे कि मोदी सरकार ने देखा तो लगातार अवशेष मूल्य पर खर्च में तेजी लाई गई। ऐसा माना जाता है कि कैपेक्स का इकोनोमी पर मल्टीप्लेयर प्रभाव होता है। पिछले बजट में कैपेक्स करीब 10 लाख करोड़ रुपये था।

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