Breaking
Wed. Apr 17th, 2024

[ad_1]

सरकारी पेंशन योजनाएँ: केंद्र की मोदी सरकार ने महिला कर्मचारियों को बड़ी राहत दी है। महिला सरकारी कर्मचारी अब अपने बच्चे को फैमिली पेंशन के लिए नॉमिनेट कर सकती है। पुराने नियमों के तहत किसी भी महिला सरकारी कर्मचारी पति को नामांकित नहीं किया जा सकता था। सरकारी कर्मचारी के निधन के बाद सबसे पहले परिवार पेंशन स्पाउज (पति/पत्नी) को ही मिला था। उनके बाद बच्चों की फैमिली पेंशन मीटिंग की बारी आती थी।

छात्र, लोक याचिका एवं पेंशन मंत्रालय ने बताया कि सीसीएस (पेंशन) नियम, 2021 के नियम 50 के (8) और सब-नियम (9) के अनुसार, यदि किसी मृत सरकारी कर्मचारी या पेंशनभोगी के पति या पत्नी के परिवार में है, तो पहले पति या पत्नी को पारिवारिक पेंशन दी जाती है। मृत सरकारी कर्मचारी या पेंशनभोगी के पति या पत्नी के लिए पारिवारिक पेंशन के लिए पात्र होते हैं या उनकी मृत्यु के बाद उनके बच्चे और परिवार के अन्य सदस्य पारिवारिक पेंशन के लिए पात्र होते हैं।

पेंशन और पेंशनभोगी कल्याण विभाग को मंत्रालयों की सूची से बड़ी संख्या में ऐसे संदर्भ प्राप्त हुए, जिनमें से निर्धारित छूट दी गई थी कि क्या बाल कलह की वजह से या अदालत में तलाक के लिए नामांकन पत्र की स्थिति या घरेलू हिंसा से महिला संरक्षण अधिनियम, दस्तावेज़ निषेध अधिनियम या भारतीय दंड संहिता के तहत केस दर्ज करने की स्थिति में किसी सरकारी महिला कर्मचारी महिला पेंशनभोगी को उसके पति या पत्नी के स्थान पर अपने बच्चों या बच्चों को पारिवारिक पेंशन के लिए नामित करने की राशि दी जा सकती है?

इस प्रश्न के उत्तर में अंतर-मंत्रालयी परामर्श के बाद यह तय किया गया कि यदि किसी सरकारी महिला कर्मचारी या महिला पेंशनभोगी की तलाक की तलाक अदालत में नियुक्ति है, या सरकारी महिला कर्मचारी या महिला पेंशनभोगी ने अपने पति के खिलाफ घरेलू हिंसा से महिला संरक्षण अधिनियम या दहेज प्रतिषेध अधिनियम या भारतीय दंड संहिता के तहत मामला दर्ज किया गया है। तो ऐसी सरकारी महिला कर्मचारी या पेंशनभोगी अपनी मृत्यु के बाद अपने पात्र बच्चे या बच्चों को पारिवारिक पेंशन के लिए अपने पति से पहले नौकरी की पेशकश कर सकते हैं।

ऐसे मामलों में बच्चों को परिवार पेंशन देने के लिए तरजीह देने के लिए सरकार ने नियम बनाए हैं। जिसमें सरकारी महिला कर्मचारी-पेंशनभोगी का तलाक से जुड़ा मामला कोर्ट में है या सरकारी महिला कर्मचारी-पेंशनभोगी ने अपने पति के खिलाफ घरेलू हिंसा या तलाक कानून या दण्ड के तहत मामला दर्ज किया है, तो ऐसी महिला कार्यालय प्रमुखों को सजा दी जा सकती है। उनकी मृत्यु के दौरान उनके परिवार के साथ रहने की स्थिति में, उनके पति या पत्नी से पहले उनके बच्चों को पेंशन दी जाती है।

यदि महिला कर्मचारी या पेंशनधारक जिसने यह त्याग किया था, उसकी मृत्यु हो गई है, तो परिवार पेंशन भुगतान में यह देखा जाएगा कि मृत सरकारी महिला कर्मचारी – पेंशनभोगी के परिवार में विधुर है और सरकारी महिला कर्मचारी – पेंशनभोगी की मृत्यु की तारीख किसी भी बच्चे के परिवार को नहीं दी जाएगी पेंशन के लिए पात्र नहीं है, वहाँ विधुर को पारिवारिक पेंशन दी जाएगी। यदि बच्चा अवैयस्क या अयोग्य है तो पेंशन गार्जियन का अर्थ है अभिभावक को दिया जाएगा। वयस्क होने के बाद ही बच्चे को फैमिली पेंशन दी जाएगी। यदि बाल परिवार को पेंशन का पात्र नहीं मिलता है तो विधुर की मृत्यु या फिर से शादी होने तक उसकी पेंशन बनी रहेगी। सरकार का कहना है कि यह नियम महिला सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लाइसेंस में मदद के लिए लागू होगा।

ये भी पढ़ें

बजट 2024: पीएम मोदी सरकार की ओर से पहली बार पेंशन धारकों को 75,000 रुपये की मानक पेंशन दी जा सकती है।

[ad_2]

Related Post

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *