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Wed. Jun 19th, 2024

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घरेलु एयरलाइन्स एयरलाइंस एक तरफ जहां अपनी-अपनी नावों में बड़ी संख्या में नए विमान शामिल कर रही हैं, वहीं दूसरी ओर देश के विभिन्न हवाई अड्डों पर अपने सैकड़ों विमान उद्योग शामिल किए गए हैं। केंद्र सरकार ने गुरुवार को संसद में इसकी जानकारी दी। प्रशंसकों पर भरोसा हवाई खिलाड़ियों के आंकड़ों की जानकारी दी गई। उन्होंने बताया कि देश के 15 अलग-अलग हवाई अड्डों पर अलग-अलग एयरलाइंस के 164 विमान ऐसे ही होते हैं। इनमें से सबसे ज्यादा 64 हवाई जहाज दिल्ली हवाईअड्डे पर हैं। चेन्नई जैसे शहरों के हवाई अड्डे पर भी बेसहारा हवाई जहाज बेकार शेयर हैं। दिल्ली के बाद इस तरह के सबसे ज्यादा प्लेन साँचे में हवाई अड्डे हैं, जहाँ उनकी संख्या 27 है। इसी तरह मुंबई हवाई जहाज पर 24 और चेन्नई हवाई अड्डे पर 20 हवाई जहाज सस्ते हैं। जहाज़ हैं, उनमें डूबे हुए जहाज़, बवार, कोच्चि, गोआ (मोपा), हैदराबाद, जयपुर, जुहू, कोलकाता, जहाज़ के जहाज़, नागपुर और रायुपर शामिल हैं। ये हवाई जहाज इंडिगो, स्पाइसजेट, गो फर्स्ट, एअर इंडिया, जुम एयर और अलायंस एयर जैसे जेट के हैं। इसी तरह दिल्ली एयरपोर्ट पर गो फर्स्ट के 23 प्लेन, स्पाइसजेट के 6 प्लेन, एअर इंडिया के 2 प्लेन, जूम एयर के 5 प्लेन, जेट एयरवेज के 3 प्लेन और अलायंस एयर के 1 प्लेन शामिल हैं। एयरपोर्ट इंडिगो के 17, गो फर्स्ट के 9 और स्पाइसजेट के 1 प्लेन स्टेक हैं। मुंबई में गो फर्स्ट के 9, जेट एयरवेज के 6, एयर इंडिया के 5, जनरल इवेलुएशन के 4 और सिपोसजेट के 1 प्लेन स्टैंडर्ड हैं।

95 प्लान के लिए प्रैट एंड व्हिटनी जिम्मेदारी

< p>भारत में घटिया हवाई जहाज़ों का सबसे बड़ा कारण इंजन की समस्या है। जो विमान अभी भी देश के विभिन्न हवाई अड्डे पर सबसे कम कीमत पर हैं, उनमें से 95 प्रतिशत के लिए इंजन सप्लायर प्रैट और व्हिटनी जिम्मेदार हैं। प्रैट एंड व्हिटनी के इंजनों के आविष्कार के बाद दुनिया भर में कई मॉडलों को जमीन पर उतारने के निर्देश दिए गए। उसके बाद कंपनी ने अभी तक समस्या दूर नहीं की है। मंत्री ने बताया कि कंपनी मार्ट चेन की कंपनियों का सामना कर रही है। उसे जल्द से जल्द समस्याओं को दूर करने के लिए कहा गया है।

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