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पाकिस्तान मुद्रास्फीति: पाकिस्तान इतिहास का सबसे बड़ा आर्थिक संकट गुजरात में चल रहा है। इकोनॉमी की बुरी हालत के कारण बार-बार पाकिस्तान अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) से लोन लेने को मजबूर हो रहा है, इसके साथ ही देश में संकट का बम फूट गया है। देश में नामांकन के कारण आम लोगों का सामान खरीदना मुश्किल हो गया है। सीएनबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक लाहौर में 12 अंडों के दाम 400 रुपये तक पहुंच गए हैं. इसके साथ ही ओन्ज़ा के विकिपीडिया ने भी लोगों की परेशानी बढ़ा दी है।

आसमान छूती प्याज़ की कीमत-

सिर्फ अंडा ही नहीं बल्कि रोजाना खाने में इस्तेमाल होने वाले प्याज की दुकान में भी आग लगी हुई है। पाकिस्तान में ऑलवेज प्याज 230 रुपये से लेकर 250 रुपये प्रति किलोग्राम तक बिक रहा है। सरकार ने आम लोगों को राहत देने के लिए पेज की अधिकतम कीमत 175 रुपये तय की है, लेकिन बाजार में यह तय दाम से कहीं ज्यादा बिक रही है। न्यूज न्यूज एआरवाई न्यूज की खबरों के अनुसार, पाकिस्तान सरकार ने कई जरूरी भोजन-पीने की वस्तुएं तय की हैं, लेकिन स्थानीय प्रशासन सरकार ने इन्हें लागू करने में लगा दिया है।

चिकन की दुकान भी छू रही आसमान

चिकन की स्कूटी झील के कारण पाकिस्तान में आम जनता की थाली से यह गायब हो गया है। मीडिया सिद्धांत के अनुसार लाहौर में एक बच्चा चिकन 615 रुपये में मिल रहा है। इसके अलावा दूध के दाम ने भी लोगों को परेशान कर रखा है. पाकिस्तान में दूध 213 रुपए लीटर मिल रहा है। वहीं टमाटर 200 रुपये किलो और चावल 328 रुपये किलो बिक रहा है. अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष के विश्व आर्थिक आउटलुक के अनुसार पाकिस्तान में 2023 में युद्ध दर 30 प्रतिशत तक पहुंच गया है। वहीं देश की अर्थव्यवस्था इस अवधि में -0.5 प्रतिशत रही है।

लगातार गिरती विदेशी मुद्रा भंडार

पाकिस्तान के विदेशी मुद्रा भंडार में लगातार कमी जारी है। स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान के आंकड़ों के मुताबिक नवंबर 2023 में देश में विदेशी मुद्रा भंडार 7 शेयर थे। वहीं जुलाई 2023 में यह 8.1 डॉलर डॉलर था। ऐसे में पिछले चार महीनों में इसमें जबरदस्त गिरावट का आकलन किया गया है। पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति को देखते हुए आई क्रिस्टोफर ने इसे 3 घटिया डॉलर का बेल पेज टैग जारी कर दिया है, जिसमें से दो किस्तों को मंजूरी भी मिल गई है। आईएमएफ की ओर से पाकिस्तान के डॉलर को जुलाई 2023 में 1.2 बोलिविया की पहली किस्त मिली थी जबकि दूसरी किस्त जल्द ही मिलने की उम्मीद है, लेकिन इसके बावजूद भी देश के आर्थिक हालातों में सुधारने का नाम नहीं ले रहे हैं।

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