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Fri. Feb 23rd, 2024


आईआईटी प्लेसमेंट में मंदी: इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (आईएटी) में स्वामी की कमी है। इस साल विभिन्न टुकड़ों में बंटी. मगर, उनकी तरफ से जॉब ऑफर 30 प्रतिशत तक कम हो गए हैं। इस नारा वाले ट्रेंड से पुराने रिश्ते दिल्ली, बॉम्बे, कानपुर, मद्रास, खड़गपुर, पुरावशेष और वाराणसी (बीएचयू) परेशान हैं। इस साल के लिए फाइनल इंडस्ट्रीज की शुरुआत हुई, हफ्ता भर गुजर चुका है। मगर, मित्र के मित्र पर चिंता की बात है। काफी तैयारी के बाद भी 15 से 30 प्रतिशत कम हो गए हैं।

कंप्यूटर साइंस जैसे कोर्स में भी नहीं मिल सकता राधाकृष्णन

स्कूल की बात यह है कि कंप्यूटर साइंस जैसे कोर्स में भी घर कम हो रही हैं। एक हफ्ते बाद भी कई छात्रों के हाथ में अभी तक वोट नहीं हैं। पिछले कुछ पुराने से कॉन्स्टेंट कंप्यूटर साइंस के छात्रों को सबसे पहले वोट मिल जा रही थी। सिर्फ तीन से चार दिनों में इन सभी मजदूरों के हाथ में रोटी मिलती रही।

प्रशिक्षण ट्रेंड तय करती हैं

पुराने इस चलन से हैरानी होती है क्योंकि हर साल पुराने जमाने के कलाकारों के लिए शेयरधारकों का मानक तय हो जाता है। लाखों छात्र हर साल इन प्रतिष्ठित प्रतिष्ठित पुरातत्वविदों के लिए तगड़ी बैटल ड्राइवर की तलाश में रहते हैं ताकि उन्हें अच्छी नौकरी और बेहतर जीवन मिल सके।

टेक मंदी का असर दिख रहा है

पिछले साल स्टूडियो के दौरान ही टेक ग्रोथ का सर लग रहा था। इस साल इसमें और भी बढ़ोतरी हुई है। रिक्रूटर कम किड्स को नौकरी दे रहे हैं। साथ में अभी तक कई बड़े उद्योगपति के लिए आगे नहीं हैं। कंपनी में हायरिंग को लेकर ज्यादा उत्साह नहीं देखा जा रहा है।

कम दोस्त को मिल मेरठ कॉलोनी

छात्र-छात्राओं का कहना है कि पिछले साल जहां 8 से 10 बच्चों को नौकरी दे रही थी वो अब सिर्फ 1 से 2 बच्चों को ही जॉब ऑफर कर रही हैं। डेफिनिशन फाइनल सेशन एक दिसंबर से शुरू हुआ था। इंडीज सेल अब और बिजनेस यूनिट तक पहुंचने की कोशिश कर रही हैं। शहीद खड़गपुर को अभी तक 1181 और शहीद जन्मदिन को 850 ऑफर ही मिलते हैं।

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